इन संबंधों का मतलब आर्थिक और शारीरिक हवस है..जिनके दो विपरीत लिंग के व्यक्ति हैं इसलिए साथ-साथ रहते हैं की उनकी शारीरिक भूख की देखभाल हो सके क्योंकि कोठे पर जाना आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से निम्न कार्य है..अगर कोई महिला 40 साल के बाद यह कार्य करती है तो उससे मूर्ख कोई स्त्री इस धरती पर नहीं है..आजकल स्त्री/पुरुष पति पत्नी बनना ही मुश्किल से साथ टिक छूते हैं..जहां माता-पिता खुशहाल और भाइयों का हस्तक्षेप सभी का दबाव रहता है..फिर इन बेहुदे संबंध की तो कोई अवश्य भी नहीं होती..बड़े शहरों में अमीर महिलाएं अपने शौक के लिए पहले पालतू कुत्ता पालती थी..पहले कुत्ते के साथ चलने का फैशन नहीं था..पुरुषोत्तम स्त्री का माल घूमने की फिराक में रहता है और स्त्री पुरुष का जो हाथ लगता है लेकर फंस जाते हैं..अगर किसी अविवाहित पुरुष पर कोई महिला फिदा हो रही है तो समझ जाए अविवाहित के दिन पूरे हो गए हैं और अगर कोई अविवाहित महिला पर युवा पुरुष फिदा हो रहे हैं तो उस महिला का अंत निकट है. सहारा ढूंढते हैं अन्यथा हर किसी माल की फिराक में साथ रहने का ढोंग करते हैं और मोका मिलते ही हत्या कर देते हैं या जोर-जबरदस्ती करके अपना नाम करा लेते हैं... अगर आप भी किसी लाइफ इन रिलेशनशिप के बारे में सोच रहे हैं तो सावधान.... बड़ा धोखा है इस राह में.. पुरुष तो 99% शादीशुदा होते हैं जो सिर्फ मौज शौक के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं.. और लड़कियां भी आजकल अंकल की संकल
बात बुरी लगी हो तो माफी चाहता हूं
"सच्ची मोहब्बत बड़े नसबों से मिलती है"❤️
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