Friday, 20 March 2020

बदगुमान


         
                         बदगुमान

आज एक  मशवरा आप से शुरू करना चाहूंगा ! यह शब्द कुछ अलग सा है!  आप लोगों के दिमाग में भी यह सब चलता  होगा! " जिसेेे कहते हैं बद गुमान"
      इस शब्द को कुछ अलग अंदाज़ से बताना चाहूंगा!
इसमें कुछ उर्दू शब्द है जिसका में मतलब बता देना चाहता हूं! जैसे
 * बद गुमान का मतलब भरोसा ना करना या शक करना!
 * मुताअल्लिक का मतलब  संबंधित!
* मुब्तला मतलब विपत्ति मैं!
 बहुत से मर्दों और औरतों व दोस्तों की यह आदत होती है! कि जहां उन्होंने दो आदमियों को अलग होकर चुपके चुपके बातें करते हुए देखा! कि फौरन बदगुमान हो जाती है! कि यह मेरे ही मुतअल्लिक कुछ बातें हो रही हैं!
और मेरे ही खिलाफ कोई साजिश हो रही है!

इसी तरह औरतें अगर अपने शौहर को अच्छा लिबास पहन कर कहीं जाते हुए देखती हैं! या शौहर को किसी औरत के बारे में कुछ कहते हुए सुन लेती हैं!
तो उनको फौरन अपने शौहर के बारे में यह बदगुमान हो जाती है! कि ज़रूर मेरे शौहर का फलानी औरत से कुछ साजबाज़ है ।

इसी तरह शौहर का भी हाल है कि अगर उनकी बीवियाँ मायके  में ज्यादा ठहर गई या मायके के रिश्तेदारों से बात या उनकी खातिर - दारात करने लगीं तो शौहर को यह बदगुमान हो जाती है कि मेरी बीवी फलाँ फलाँ  से मुहब्बत करती है ,
कहीं कोई बात तो नहीं है ?

बस इस बदगुमान में तरह तरह की जुस्तजू  लगाने की फ़िक्र में मुब्तला होकर दिन रात दिमाग में अल्लम गुल्लम किस्म के ख्यालात की खिचड़ी पकाने लगते हैं और कभी कभी राई का पहाड़ और फांस का बांस बना डालते हैं । प्यारी बहनो और भाईयो! याद रखो कि बद गुमानियों की यह आदत बहुत बुरी बला , और बहुत बड़ा गुनाह है !

 "अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया है कि यानी बद गुमान गुनाह हैं । लिहाज़ा जब तक खुली हुई दलील से तुमको किसी बात का यकीन न हो जाये या जब तक उससे ही ना पूछ लिया जाए ! तब  तक बे बुनियाद गुमानों से कोई राय काइम न कर लिया करो।"

 " भरोसा परिवार और रिश्ते की सबसे बड़ी न्यूव है भरोसा आदमी के दिल मैं होता हे ना कि दिमाग !

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