बाल विवाह
आज भी हमारे गांव व शहरों में बाल विवाह किया जाता है
"पर क्यों :
समाज के डर से या कम उम्र में लड़की के भागने के डर से ! क्यों उसे से जीने का अधिकार नहीं है! आज इसी बात पर चर्चा करेंगे !
' मैं कम शब्दों में अपनी बात रखना चाहूंगा !
"' 'देख जमाने की हरकत मैं वो नैन गीले कर दिए गांव ने मिलकर जब उस बच्ची के हाथ पीले कर दिए! ' ना जाने कैसी आग थी क्या श्राप था कोई छाती पर 'उम्र 13 की थी क्या बोझ था किसी जाति पर ' ! बचपन का हर किस्सा हर पल यूं ही सताता है ! अंग में लिपटे चिथड़ो को नोच नोच कर खाता है! रो रो कर , देखो उस बच्ची ने दामन पूरा भर दिया ! हाथ से कलम छीन कर चूल्हे के हवाले कर दिया ! ' क्या बेटी होना पाप है ! ये बात की एक बात थी जला था बचपन मंडप में कैसी मनुष रात थी ! जूता था स्कूल का एक पैर में थी बेड़िया मर्द था यथा शायद वो बेड़िया है ! जश्न्न का माहौल देखो गांव पूरा मिल रहा वो अकेली थी लड़ रही वो हर सपना जैसे जल रहा था ! वक्त ऐसा आ गया विदाई उसकी हो गई चंद लम्हों में देखो बचपन से जुदाई हो गई ! होश तक ना था उसे छिन्न-भिन्न कर दिया ! हुकदार मां के लाड की वस्त्र हीन कर दीया !हैवानियत का नाच था! बचपन की इज्जत लूट रही बुलाती कैसे भगवान को आस्था ही नहीं उठ रही! फिर खेल चल पड़ा बिस्तर पर ' कुछ भी ना सोचा जाता था ! हर रात मांस के टुकड़ों को नोचा खरोचा जाता था ! डगमगाते पैरों से फिर कुछ ना संभल रहा था ! और घुंघट की आड में था ! बचपन जल रहा था सफर चला 9 महीने का हर रोज तबाह किया ! 14 की उम्र में फिर मां उसे बना दिया ! बेहतर है जानवर वो तो इंसान थी कह गई वह मां की थी ही लाडली अब मां बन कर रह गई ! कालचक्र ऐसा था ! खुद को वो भूल गई ! बच्चे की चिंता में फंदे से झूल गई ! रूह से अबतलक चीख यही आती है "बाल विवाह" के बोझ में ये बेटियां मर ही जाती है !
मां-बाप हो तो मां बाप का फर्ज ऐसे अता करो ! 18 के बाद ही बेटियों को रुखसत करो बच्चों की शादियों का जश्न्न यूं ही बना रहे लाल जोड़े की आड़ में कफन यूं हम शीला रहे है !
" यह मेरे दिल की बात थी जो कहना था "!
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