Tuesday, 24 November 2020

पराया अपना और अपना पराया हो गया



              पराया अपना और अपना पराया इन शब्दों का मतलब रिश्तो से है बात कड़वी है पर सच है!     

आजकल मनुष्य अपने परिवारों में ही भेदभाव रखता है ! जैसे परिवार अलग-अलग व्यक्तियों से मिलकर बनता है और परिवार में कोई अमीर होता है और कोई गरीब होता है! तो इसका मतलब यह नहीं है कि परिवार में भेदभाव करें !अधिकतर लोग अपने ही परिवार के लोगों से मिलने में शर्माते या उनसे मिलना अच्छा नहीं लगता है ! क्योंकि वह गरीब होते हैं या उनकी किसी बात का बुरा लगा होता है या उनका घर छोटा होता है या उनके पास पैसे की परेशानी होती है! यह बातें तो सबके परिवार में होती है! तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन रिश्तो को आप भूल जाओ या उनसे मिलना जुलना बंद कर दो ! कई समस्याओं का हल आपस में बैठकर भी किया जा सकता है! पर इन सभी  कारणों से कई बार ऐसे व्यक्ति से भी दूर हो जाते हैं! जिनके पास रहता कुछ नहीं है पर उनका दिल बहुत बड़ा होता है ऐसे रिश्तो को आप नजरअंदाज करके आप ऐसे व्यक्ति को ज्यादा तवज्जो दे देते हो ( मैंने कुछ दिन पहले ही देखा है और मुझे उसके बारे में सोच कर 😠हैरानी होती है)! जो ऊपर से तो मीठे होते पर अंदर से और कुछ होता है! या फिर उनके नजरों में आपकी कोई वैल्यू नहीं होती है! और अधिकतर हम पराए व्यक्ति को अपना बनाने के चक्कर में हम अपने व्यक्ति को पराया कर देते हैं! मेरा कहने का मतलब यह  नहीं है कि आप पराए व्यक्ति से अच्छे रिश्ता नहीं बनाए ! पराए व्यक्ति से भी रिश्ता रखना चाहिए पर जो पहले से ही अपने हैं उनको ज्यादा तवज्जो देना चाहिए     

      लास्ट मैं इतना कह कर अपनी बात को खत्म करना चाहूंगा "बहुत सारे धागे मिलकर एक रस्सी का निर्माण करते हैं" वैसा ही "कई लोग मिलकर एक परिवार का निर्माण करते हैं"

बाल विवाह