Tuesday, 31 March 2020

मर्दों के दिल में औरत के लिए मोहब्बत ?


मर्दों के दिल में औरत के लिए मोहब्बत ??

अल्लाह ने जब #औरत को बनाया तो मर्द के दिल में उसके मोहब्बत पैदा की !!ताकि ज़मीन पर उस की नस्लें चले!
लेकिन ज़मीन पर शैतान ने अपनी चाल चली और#काफिर के दिल में हवस पैदा कर !
इसका नतीजा यह हुआ कि उसने एक लड़की के साथ जिस्मानी ताल्लुक के लिए अपने ही भाई का #क़त्ल कर दिया

" जिन मर्दों के दिल में औरत के लिए मोहब्बत थी !
उन्होंने उसे बीवी के रूप में घर की मलिका बनाया !
माँ के रूप में जन्नत की क़दर की ! 
बेटी के रूप में आँखों की ठंडक समझा !
बहन के रूप में उसकी दिल से #इज़्ज़त की " !
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और जिनके दिल में औरत के लिए हवस थी! उन्होंने औरत को सिर्फ तवाईफ का रूप दिया! घर से निकाल कर बाज़ार की ज़ीनत बनाया ! मर्दों के ज़हन साज़ी इस तरह कि उन्होंने औरत को सिर्फ जिस्म की #तस्किन का ज़रिया समझना शुरू कर दिया !और वह #जानवरों से भी बदतर हो गए ! गंदी फिल्में बनी ! पूरी दुनिया में इसका कारोबार हुआ !और अब सब कुछ #इंटरनेट पर आम कर दिया है ! इन फिल्मों ने  नोजवान युवक का ज़हन भी खोखला करना शुरू कर दिया !
सबसे पहले मर्दों की नज़र से हया #खत्म हुई !और इसके खत्म होने से औरत की इज़्ज़त भी खत्म हो गई !और अब यह हाल है कि लड़की से निकाह के बजाय उसे पटाने उसे फंसाने और #निकाह से पहले ही सारी हदें पार करने की कोशिश की जाती है !और इसमें अब तो बा-आसानी कामयाब भी हो जाते हैं !
.इस #मोहब्बत की जगह हवस के आने से वह मकसद जिस के लिए औरत को बनाया वह भी कहीं खो गया !अब अगर किसी से यह कहा जाए कि वह शादी क्यों करना चाहता है तो #अक्सरियत यही कहती हैं कि हम तो मजे लेने के लिए शादी कर रहे हैं !और जब मज़ा खत्म हो जाता है तो फिर ये मर्द तलाक भी दे देता हैं ! मानो औरत एक #कागज का टुकड़ा बन गई !
इस्तेमाल किया और फेंक दिया !!
इसी हवस का नतीजा है कि मर्द ने अपनी तस्किन का ही सोचा ! यह कभी सोचा ही नहीं कि औरत को क्या चाहिए इसका जब दिल चाहता है वह #इन्जॉय करता है !!
औरत क्या चाहती है उसने ये समझने और जानने की कोशिश ही नहीं की !!  
औरत घर की जन्नत होती है !😇

Friday, 20 March 2020

बदगुमान


         
                         बदगुमान

आज एक  मशवरा आप से शुरू करना चाहूंगा ! यह शब्द कुछ अलग सा है!  आप लोगों के दिमाग में भी यह सब चलता  होगा! " जिसेेे कहते हैं बद गुमान"
      इस शब्द को कुछ अलग अंदाज़ से बताना चाहूंगा!
इसमें कुछ उर्दू शब्द है जिसका में मतलब बता देना चाहता हूं! जैसे
 * बद गुमान का मतलब भरोसा ना करना या शक करना!
 * मुताअल्लिक का मतलब  संबंधित!
* मुब्तला मतलब विपत्ति मैं!
 बहुत से मर्दों और औरतों व दोस्तों की यह आदत होती है! कि जहां उन्होंने दो आदमियों को अलग होकर चुपके चुपके बातें करते हुए देखा! कि फौरन बदगुमान हो जाती है! कि यह मेरे ही मुतअल्लिक कुछ बातें हो रही हैं!
और मेरे ही खिलाफ कोई साजिश हो रही है!

इसी तरह औरतें अगर अपने शौहर को अच्छा लिबास पहन कर कहीं जाते हुए देखती हैं! या शौहर को किसी औरत के बारे में कुछ कहते हुए सुन लेती हैं!
तो उनको फौरन अपने शौहर के बारे में यह बदगुमान हो जाती है! कि ज़रूर मेरे शौहर का फलानी औरत से कुछ साजबाज़ है ।

इसी तरह शौहर का भी हाल है कि अगर उनकी बीवियाँ मायके  में ज्यादा ठहर गई या मायके के रिश्तेदारों से बात या उनकी खातिर - दारात करने लगीं तो शौहर को यह बदगुमान हो जाती है कि मेरी बीवी फलाँ फलाँ  से मुहब्बत करती है ,
कहीं कोई बात तो नहीं है ?

बस इस बदगुमान में तरह तरह की जुस्तजू  लगाने की फ़िक्र में मुब्तला होकर दिन रात दिमाग में अल्लम गुल्लम किस्म के ख्यालात की खिचड़ी पकाने लगते हैं और कभी कभी राई का पहाड़ और फांस का बांस बना डालते हैं । प्यारी बहनो और भाईयो! याद रखो कि बद गुमानियों की यह आदत बहुत बुरी बला , और बहुत बड़ा गुनाह है !

 "अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया है कि यानी बद गुमान गुनाह हैं । लिहाज़ा जब तक खुली हुई दलील से तुमको किसी बात का यकीन न हो जाये या जब तक उससे ही ना पूछ लिया जाए ! तब  तक बे बुनियाद गुमानों से कोई राय काइम न कर लिया करो।"

 " भरोसा परिवार और रिश्ते की सबसे बड़ी न्यूव है भरोसा आदमी के दिल मैं होता हे ना कि दिमाग !

Tuesday, 3 March 2020

               

                           बाल विवाह
आज भी हमारे गांव व शहरों में बाल विवाह किया जाता है
"पर क्यों :
समाज के डर से या कम उम्र में लड़की के भागने के डर से ! क्यों उसे से जीने का अधिकार नहीं है! आज इसी बात पर चर्चा करेंगे !
' मैं कम शब्दों में अपनी बात रखना चाहूंगा !
"' 'देख जमाने की हरकत मैं वो नैन गीले कर दिए गांव ने मिलकर जब उस बच्ची के हाथ पीले कर दिए! ' ना जाने कैसी आग थी क्या श्राप था कोई छाती पर 'उम्र 13 की थी क्या बोझ था किसी जाति पर ' ! बचपन का हर किस्सा हर पल यूं ही सताता है ! अंग में लिपटे चिथड़ो को नोच नोच कर खाता है! रो रो कर , देखो उस बच्ची ने दामन पूरा भर दिया ! हाथ से कलम छीन कर चूल्हे के हवाले कर दिया !  ' क्या बेटी होना पाप है ! ये बात की एक बात थी जला था बचपन मंडप में कैसी मनुष रात थी ! जूता था स्कूल का एक पैर में थी बेड़िया मर्द था यथा शायद वो बेड़िया है ! जश्न्न का माहौल देखो गांव पूरा मिल रहा  वो अकेली थी लड़ रही वो हर सपना जैसे जल रहा था ! वक्त ऐसा आ गया विदाई उसकी हो गई चंद लम्हों में देखो बचपन से जुदाई हो गई ! होश तक ना था उसे छिन्न-भिन्न कर दिया ! हुकदार मां के लाड की वस्त्र हीन कर दीया !हैवानियत का नाच था! बचपन की इज्जत लूट रही बुलाती कैसे भगवान को आस्था ही नहीं उठ रही! फिर खेल चल पड़ा बिस्तर पर ' कुछ भी ना सोचा जाता था ! हर रात मांस के टुकड़ों को नोचा खरोचा जाता था ! डगमगाते पैरों से फिर कुछ ना संभल रहा था ! और घुंघट की आड में था ! बचपन जल रहा था  सफर चला 9 महीने का हर रोज तबाह किया ! 14 की उम्र में फिर मां  उसे बना दिया ! बेहतर है जानवर वो तो इंसान थी कह गई वह मां की थी ही लाडली अब मां बन कर रह गई ! कालचक्र ऐसा था ! खुद को वो भूल गई ! बच्चे की चिंता में फंदे से झूल गई ! रूह से अबतलक चीख यही आती है "बाल विवाह" के बोझ में ये बेटियां मर ही जाती है !
     मां-बाप हो तो मां बाप का फर्ज ऐसे अता करो ! 18 के बाद ही बेटियों को रुखसत करो बच्चों की शादियों का जश्न्न यूं ही बना रहे लाल जोड़े की आड़ में कफन यूं हम शीला रहे है !
" यह मेरे दिल की बात थी जो कहना था "!

बाल विवाह